Monday, October 30, 2017

#Life


2 comments:

खलल (तीन कवितायेँ)

१.  ज़िंदगी से जूझ कर मौत से युद्ध कर  ऐ दुनिया!  इंसान को इंसान से मिला, खलल पैदा कर  इस अनवरत चक्र में, वक्त के पाटों म...