Sunday, August 13, 2017

वो काली रात


2 comments:

  1. ये भी एक कडवी सच्चाई है ... इतिहास का सबक अगर कोई सीखना चाहे तो ... पर क्या होगा ... कहीं इतिहास दोहराएगा तो नहीं अपने आप को ...

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  2. आखिर बरबादियों की ओर चल पड़े हैं हम। फिर भी उम्मीद कायम रखनी ही होगी।

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दूर हूँ....कि पास हूँ

मैं बार-बार मुस्कुरा उठता हूँ  तुम्हारे होंठो के बीच, बेवज़ह निकल जाता हूँ तुम्हारी आह में, जब भी उठाती हो कलम लिख जाता हूँ तुम...