Tuesday, July 25, 2017

Truth can never be killed (सच कभी मारा नहीं जा सकता)

मेरे साथियों !
आओ भोंक दो मेरे सीने में अपने पैने खंज़र ,
टुकड़े - टुकड़े कर दो मेरे,
बहा दो मेरे जिस्म से खून की धार
फिर भी नहीं मरूंगा मै !

मुझे मारने का दिन-रात षड्यंत्र करने वालों ,
ओढ़ लो स्वार्थ की सफ़ेद चादर ,
काली पट्टियां बाँध लो अपनी आँखों पर
देने लगो न्याय विक्रमादित्य की तरह ;
फिर भी नहीं मार पाओगे तुम :
उस सच को ,
जो ज़िंदा रखेगा मुझे तुम्हारे आसपास ,
मेरी आवाज़ तुम्हेु फुफकारगी ,
सांय - सांय करने लगेंगे तुम्हारे कान ,
मेरा सच भीतर ही भीतर खोखला कर देगा तुम्हें ,
तुम ज़िंदा लाश बन घूमते रहोगे यंहा - वंहा,
और मैं ; मरकर भी जीवित रहूंगा अपने सच मे
क्योंकि सच कभी मारा नहीं जा सकता।



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मैं बार-बार मुस्कुरा उठता हूँ  तुम्हारे होंठो के बीच, बेवज़ह निकल जाता हूँ तुम्हारी आह में, जब भी उठाती हो कलम लिख जाता हूँ तुम...