Z

Monday, July 24, 2017

जिंदा रहने की ख्वाहिश

मेरे जीवन के कटुतम रंगों में
तुम्हारा रंग सबसे मधुर  है .
जीवन के संघर्षों के धूसर लम्हों में
तुम हरियाली की तरह आती हो
और मुझे सुर्ख कर जाती हो .
सब कुछ ख़त्म होने की कगार पर भी
तुम मुझे डटे रहने का हौसला दे जाती हो .
तुम्हारी जाती ज़िंदगी के बारे में अनजान हूँ फिर भी ;
ज़न्मों की पहचान लगती है हमारी .
तुम्हारी खिलखिलाहट को बस एक नज़र देखकर
हजारों मौतों का नज़ारा भूल जाता हूँ .
हाँ मै मुर्दा लोगों को उनके अंतिम स्थान तक ले जाता हूँ
फिर भी रोज़ जिंदा रहने की ख्वाहिश रखता हूँ .



No comments:

Post a Comment